अमीरों की बस्ती में हमेसा सुनसान माहौल देखा है मैंने
गरीबों की झोपडी में हमेशा मुस्कुराते चेहरे को देखा है मैंने
बड़े बड़े महलों में भी मैने अकेलपन देखा है मैंने
छोटे छोटे घरों में भी मेने अपनों का प्यार देखा है मैंने
रहीशो का दिखावा देखा है मैने
संयुक्त परिवार का अपनापन भी देखा है मैने
चमकते महलो में भी खामोशियो का शोर सुना है मैंने
आँगन की मिट्टी से खेलता बचपन देखा है मैने
बिखरते रिश्तो को देखा है मैने
मुश्किलो में सँभालते अपनों को देखा है मैने
वृदाश्रम में माँ बाप को अपने बच्चो के लिए तरसते देखा है मैने
इस कलयुग में भी कही कही श्रवण कुमार देखे है मैंने
सबको अपनी समस्या से जूंझते देखा है मैने
कभी खुद को टूटा महसूस किया तो अपने परिवार की आँखों में अपने लिए भरोसा देखा है मैने